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His Life

जन्म एवं बचपन के वर्ष

श्रीअतुल कुमार गुप्ता का जन्म 21 जुलाई 1956 को बिजनौर में ज़िले के सुप्रसिद्ध वकील श्री बनारसी प्रसाद गुप्ता एवं समाजसेविका श्रीमती विमला गुप्ता के घर हुआ था । 2 बहनों और 4 भाइयों के भरेपूरे परिवार में यह सबसे छोटे और सर्वाधिक लाडले थे । बचपन से ही इन्हे साहित्य, संगीत और क्रिकेट में अत्यधिक रूचि थी । 9 वर्ष की उम्र में भारत के प्रधामंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री के अकस्मात निधन से दुखी होकर इन्होने एक कविता "नहीं मरा है, नहीं मरेगा लाल बहादुर" लिखी थी जो उस समय परिवार और मित्रो में बहुत प्रचलित हो गयी थी । बचपन से ही देशप्रेम और समाजसेवा की भावना इनमें कूट कूट कर भरी थी ।

शिक्षा और किशोरावस्था

जीवन के हर पड़ाव पर प्रथम आना इन्होनें बचपन से ही सीख लिया था चाहें वो पढाई हो या वाद-विवाद प्रतियोगिता। सामान्य ज्ञान और अतिरिक्त पाठ्यक्रम गतिविधियों में सदैव सबसे आगे रहते थे । लॉ की पढाई के लिए कुछ समय बीकानेर में रहने के बाद बिजनौर का प्रेम इन्हे वापस खींच लाया और इन्होने अपना सम्पूर्ण जीवन बिजनौर में ही बिताया। 

विवाह

सन 1983 में 25 जून के दिन जब भारत की क्रिकेट टीम वर्ल्ड कप का फाइनल खेल रही थी ठीक उसी समय इनका विवाह चंदौसी निवासी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संचालक श्री मनोहर लाल अग्रवाल की सुपुत्री गार्गी से हुआ। विवाह उपरान्त इनका सामाजिक जीवन दुगनी गति से चलने लगा  जहाँ एक ओर श्री अतुल गुप्ता लायंस क्लब के प्रेसिडेंट बने,  श्रीमती गार्गी गुप्ता लायनेस क्लब की प्रेसिडेंट बनीं। जब श्री अतुल गुप्ता पश्चिमी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश संगठन मंत्री बने, उसी समय उनकी पत्नी इसी संगठन के महिला प्रकोष्ट की जिलाध्यक्ष बनीं। जहाँ एक और पति आर्य समाज में सक्रिय थे तो दूसरी और पत्नी आर्य स्त्री समाज में सक्रिय थीं । दोनों ने मिलकर आर्य सुगंध संस्थान (अनाथ दिव्यांग आश्रम) को पूरा सहयोग दिया जिसके फलस्वरूप और भी बहुत सारे लोग इस संस्थान से जुड़ गए और यह आश्रम अधिक से अधिक बच्चों की सहायता कर पाया। पति-पत्नी ने जीवन के हर कार्य में कदम से कदम मिलाकर चलने का अभूतपूर्व उदाहरण समाज के सामने रखा जिससे अनेक लोगों ने प्रेरणा ली। इस यात्रा में 20 वर्ष उपरान्त एक अवरोध आया जब इनकी पत्नी का आकस्मिक देहांत हो गया और इन्हे परिवार में दोहरी भूमिका निभाने पर मजबूर होना पड़ा । दोनों पुत्रों की देखभाल का दायित्व पूरी कुशलता से निभाते हुए भी इन्होने समाज सेवा के अपने संकलप को अपनी अंतिम सांस तक जारी रखा।

व्यवसाय

श्री अतुल गुप्ता बिजनौर के पहले व्यापारिक विधि सलाहकार बने जो जिले के सभी व्यवसायिओं और औद्योगिक इकाइयों को उनसे जुड़े कानून जैसे लेबर लॉ , कंपनी लॉ, प्रोविडेंट फण्ड लॉ , टैक्स लॉ और ऐसे ही अनेक कानूनों की उचित सलाह 35 वर्षों तक देते रहे और सभी कानूनों के अनुपालन में सहायता करी।इन्होने अपने इस व्यवसाय में इतनी तरक्की करी की जिले के हर व्यापारी ने उनका मार्गदर्शन प्राप्त करा और बिजनौर जिले में यह आम सहमति बन गयी कि श्री अतुल कुमार गुप्ता अपने क्षेत्र और विषय में अतुलनीय हैं। अपने जीवनकाल में उन्होंने अपना यह अनुभव और ज्ञान अपने सुपुत्र पुलकित को प्रदान करा जो अपने पिता के नाम और व्यवसाय को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।

सामाजिक जीवन

  • जिला बिजनौर में भारतीय जनता पार्टी को नींव से खड़ा करने और मजबूत बनाने में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लगातार दो वर्षों तक सदस्यता अभियान के प्रमुख का कार्यभार संभाला और पार्टी की सदस्यता को नयी ऊंचाइयों तक लेकर गए । भाजपा के जिला कोषाध्यक्ष के पद पर लम्बे समय तक कार्यरत रहे एवं पार्टी में अपने अंत समय तक अति महत्वपूर्ण भूमिका निभायी और बहुत सारे उभरते नेताओं का मार्गदर्शन करके उन्हें आगे बढ़ने में सहायता करी । इस दौरान देश के सर्वोच्च नेताओं जैसे पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमत्री उमा भारती, दिल्ली के पूर्व मुख्यम्नत्री साहिब सिंह वर्मा और विजय कुमार मल्होत्रा इत्यादि से मधुर सम्बन्ध रहे और इन सभी ने अतुल गुप्ता जी के आतिथ्य का संपूर्ण आनंद उठाया ।
  • सभी धर्म, विचारधारा, और राजनैतिक दलों के लोगों से उनके सदैव मधुर संबंध रहे और यही कारण है कि उनके निवास स्थान पर अक्सर अलग-अलग पृष्ठभूमि के व्यक्ति अपने वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर हर अवसर पर साथ मिलकर सुख-दुःख के पल बिताते थे । सांप्रदायिक सौहार्द के लिए उन्हें हाफ़िज़ मोहम्मद इब्राहिम अवॉर्ड से सम्मानित करा गया ।
  • लायंस क्लब बिजनौर सिटी के पहले सेक्रेटरी बनकर क्लब की नींव रखी और अगले वर्ष अध्यक्ष बनकर क्लब को आगे बढ़ाया, दशकों तक क्लब के माध्यम से समाज सेवा करी और आगे चलकर लायंस क्लब में मंडल और प्रदेश स्तर पर भी महत्वपूर्ण दायित्व संभाले ।
  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश संगठन मंत्री के तौर पर प्रदेश के व्यापारियों की समस्या निवारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी ।
  • तीन दशकों तक बिजनौर में राष्ट्रीय स्तर के कवि सम्मेलनों का आयोजन करा जिसमे देश के सर्वश्रेष्ट्र कवियों ने बिजनौर को अपनी उच्चतम रचनाओं से सम्मानित करा और बिजनौर का मंच देश के महान कवि सम्मेलनों के मंच में गिना जाने लगा । देश के महानतम कवि (जैसे पद्मश्री गोपाल दास नीरज, संतोषानंद, हरिओम पवार, सुरेंद्र शर्मा, कुंवर बेचैन, अशोक चक्रधर, ओमप्रकाश आदित्य, प्रवीण शुक्ला, सुनील जोगी इत्यादि) इनके करीबी मित्र बन गए थे और बिजनौर आकर इनके आतिथ्य का लाभ उठाने के लिए सदैव आतुर रहते थे ।
  • जिला क्रिकेट संघ के जनरल सेक्रेटरी का पदभार बहुत लम्बे समय तक संभाला और ज़िले के होनहार क्रिकेट खिलाड़ियों को राज्य स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी । बिजनौर में पहली बार राज्य स्तर के क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन करवाया जिसमे उत्तर प्रदेश एवं देश के महान खिलाड़ियों जैसे भारत के पूर्व आलराउंडर ज्ञानेंद्र पांडेय, टेस्ट टीम के स्टार स्पिनर गोपाल शर्मा, विराट कोहली के कोच राजकुमार शर्मा, इंडिया अंडर नाईन्टीन टीम के कई खिलाडी, उत्तर प्रदेश के कप्तान राहुल सप्रू और अन्य कई महान खिलाडियों ने शिरकत करी ।
  • अखिल भारतीय वैश्य अग्रवाल राजवंश सभा के अध्यक्ष के पद पर कार्य करा एवं पूरे जीवन इस संस्थान में अनेको पदों पर कार्यरत रहकर समाज सेवा करी ।
  • आर्यसमाजी विचारधारा से बचपन से ही जुड़े श्री अतुल गुप्ता आर्य समाज के युवा संगठन आर्य कुमार सभा के लम्बे समय तक प्रधान रहे और युवाओं को महर्षि दयानन्द सरस्वती के दिखाए मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी । आर्य समाज के माध्यम से अनेकों बार बिजनौर में समाज सेवा करी एवं छात्रों के लिए सामान्य ज्ञान और अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन करके छात्रों का ज्ञानवर्धन और उत्साहवर्धन करा ।

जीवन मूल्य एवं प्रमुख गुण

  • उनका यह मानना था की हर इंसान में ईश्वर का वास है और इसीलिए उनकी नज़र में हर इंसान एक सामान था और वह हर व्यक्ति का हाथ जोड़ कर अभिवादन करते थे । अमीर-गरीब, बड़े-छोटे, हर जाति और धर्म के लोगों से एक सामान व्यवहार करते थे। जितने सम्मान से वह एक सांसद या उद्योगपति से बात करते थे, उतने ही सम्मान से एक सफाई कर्मी या मज़दूर से बात करते थे। जितने प्यार से अपने से बड़ों से मिलते थे, उतने ही प्रेम से छोटे बच्चों से भी बात करते थे। जिस समय उनकी आयु करीब ३५ वर्ष थी तब वह एक वरिष्ट नागरिकों के समूह के विशेष आमंत्रित सदस्य थे और आर्य कुमार सभा जिसके सभी सदस्य १५-२५ वर्ष की आयु के थे, उसके प्रधान थे। ऐसा था उनका व्यक्तित्व कि सच में आयु उनके लिए एक संख्या मात्र थी।
  • सुख और दुःख दोनों में एक समान रहते थे और बड़े से बड़े दुःख को भी मुस्कुरा कर झेल जाते थे । कभी कभी ऐसा लगता था की वह एक कवि हैं और इसलिए चाहे कैसी भी परिस्थिति हो उसमे किसी न किसी तरह हास्य ढून्ढ ही लेते थे और बाकी सब को प्रसन्न कर देते थे। दूसरों के सुख में अपना सुख ढून्ढ लेना एक दुर्लभ गुण है परन्तु यह गुण इनमें प्रचुर मात्रा में था।
  • उनका संगठनात्मक कौशल अद्वितीय था, उनके इस गुण के साक्षी वो सारे संगठन हैं जिनसे वो जुड़े रहे और जिन्होंने उनके इस गुण का लाभ उठाया।
  • वह संसार के हर रिश्ते में खरे साबित हुए, हर भूमिका को बखूबी निभाया - चाहे वो पुत्र की भूमिका हो या पिता की, गुरु की भूमिका हो या मार्गदर्शक की, नेता की भूमिका हो या आयोजक की, हर भूमिका में उन्होंने अपनी श्रेष्ठता को साबित करा और बहुत लोगों को उनके इस गुण का लाभ मिला।
  • वह कुशाग्र बुद्धि, उत्कृष्ट ज्ञान और अद्भुत स्मृति के स्वामी थे। जिस वक़्त इंटरनेट नहीं होता था और कंप्यूटर बस आये ही थे तब लोग उन्हें ह्यूमन कंप्यूटर कहते थे और उनके ज्ञान को ही अंतिम सत्य मानते थे। अनेकों बार जब लोगों में किसी सामान्य ज्ञान के प्रश्न पर शर्त लग जाती थी तब उन्हें ही जज बनाकर बुलाया जाता था और उनके निर्णय को ही अंतिम माना जाता था, ऐसा था उनके ज्ञान पर लोगों का विश्वास।हर व्यक्ति का जन्मदिन उन्हें याद रहता था और वह अधिकतम लोगों को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने का प्रयास करते थे।
  • वह जीवन को वर्तमान में जीते थे बिना भविष्य की चिंता करे और बिना अतीत का शोक करे। उनके पसंदीदा कवि पदमश्री गोपाल दस नीरज ने सत्य ही कहा है की "जीवन के हर पल को अंतिम ही पल मान, अंतिम पल है कौन सा कौन सका है जान" इसी कथन को उन्होंने अपने जीवन में चरितार्थ करा और अपना जीवन खुल कर और हर पल पूरी तरह जिया।