ForeverMissed
हम सभी के प्रिय श्री अतुल कुमार गुप्ता का अकस्मात ही २ मई २०२१ को निधन हो गया। कोरोना महामारी के कारण हालात कुछ ऐसे थे की किसी को भी उनके अंतिम दर्शन का अवसर नहीं मिला और न ही कोई उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर पाया। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए यह वेबसाइट बनायी गयी है जो कि सभी के द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि के माध्यम का काम करेगी। उनके सभी शुभचिंतक, घनिष्ट मित्र और परिवार के लोग उनके लिए अपने विचार विडियो, ऑडियो या लिखित माध्यम से इस वेबसाइट पर पोस्ट कर सकते हैं। यदि आप उनके साथ अपने अनुभव हम सबके साथ बाँटना चाहते हैं तो इस वेबसाइट के "Stories" सेक्शन में पोस्ट कर सकते हैं, यदि आप उनके साथ अपनी कोई फोटो पोस्ट करना चाहते हैं तो "Gallery" में अपलोड कर सकते हैं। आशा है कि आप सभी के योगदान से यह वेबसाइट उनके लिए एक उपयुक्त श्रद्धांजलि का माध्यम बनेगी और उनकी यादों को एक खूबसूरत आवास प्रदान करेगी।
Posted by Aditi Gupta on July 22, 2021
Aapki kami khalti hai muje
Ye khalipan tadpata hai
Bas yu hi yad dil mei samete
Ye waqt guzarta jata hai

Ab pta chalta hai ki
Zimadariyon ka bojh kitna bhari hai
Khud se zyada
Apno ki khushiyan pyari hai
Daudhane padte hai kadam
Pakad ne ko zindagi ki raftar
Aaj guzar raha hai or
Kal ki taiyari hai

Apki majburiyo ka muje
ab ehsas hota hai
Duniya hoti hai matlabi or
Ghar ka har shaksh khaas hota h

Har baat ko pyar se samjhana
Wo yaad baht ab aata hai
Har beeta lamha ab toh bas
Aankho mei aansu laata hai
Tashveer basi hai dil mei jo
Jeene ka hoshla deti h
Isi tarah se bas ab toh
Ye waqt guzarta jata hai

Aapki kami khalti hai muje
Ye khalipan tadpata hai
Bas yunhi yaadein dil mei samete
Ye waqt guzarta jata hai..
Posted by Varun Agarwal on July 21, 2021
आदरणीय बाबूजी आपका जाना मेरे लिए बहुत ज्यादा व्यक्तिगत क्षति है. आपने मुझे इतने कम समय में इतना बहुत कुछ सिखाया जो मैं कभी नहीं भुला पाऊंगा.. आपके द्वारा दिया गया इतना प्यार ,इतना स्नेह ,इतना अपनापन मैं कैसे भुला सकता हूं .हम साथ बैठकर कितनी बातें किया करते थे .. कितनी बार लांच, कितनी बार डिनर ,कितनी बार मूवीस ,कितनी बार नाश्ता .. आखिरी बार मेरी और आपकी बात अप्रैल के आखिरी हफ्ते में हुई थी जो शायद मैं सोच भी नहीं पाया था हल्का सा भी नहीं थी कि हमारी और आपकी आखिरी बात होगी.. 2017 से आपका मेरा रिश्ता बहुत ज्यादा गहरा बन गया था हमेशा अपने बच्चों की तरह ही मुझे प्यार करते थे बाबूजी। ।
Posted by Abhishek Gupta on July 12, 2021
ॐ शांति

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Recent Tributes
Posted by Aditi Gupta on July 22, 2021
Aapki kami khalti hai muje
Ye khalipan tadpata hai
Bas yu hi yad dil mei samete
Ye waqt guzarta jata hai

Ab pta chalta hai ki
Zimadariyon ka bojh kitna bhari hai
Khud se zyada
Apno ki khushiyan pyari hai
Daudhane padte hai kadam
Pakad ne ko zindagi ki raftar
Aaj guzar raha hai or
Kal ki taiyari hai

Apki majburiyo ka muje
ab ehsas hota hai
Duniya hoti hai matlabi or
Ghar ka har shaksh khaas hota h

Har baat ko pyar se samjhana
Wo yaad baht ab aata hai
Har beeta lamha ab toh bas
Aankho mei aansu laata hai
Tashveer basi hai dil mei jo
Jeene ka hoshla deti h
Isi tarah se bas ab toh
Ye waqt guzarta jata hai

Aapki kami khalti hai muje
Ye khalipan tadpata hai
Bas yunhi yaadein dil mei samete
Ye waqt guzarta jata hai..
Posted by Varun Agarwal on July 21, 2021
आदरणीय बाबूजी आपका जाना मेरे लिए बहुत ज्यादा व्यक्तिगत क्षति है. आपने मुझे इतने कम समय में इतना बहुत कुछ सिखाया जो मैं कभी नहीं भुला पाऊंगा.. आपके द्वारा दिया गया इतना प्यार ,इतना स्नेह ,इतना अपनापन मैं कैसे भुला सकता हूं .हम साथ बैठकर कितनी बातें किया करते थे .. कितनी बार लांच, कितनी बार डिनर ,कितनी बार मूवीस ,कितनी बार नाश्ता .. आखिरी बार मेरी और आपकी बात अप्रैल के आखिरी हफ्ते में हुई थी जो शायद मैं सोच भी नहीं पाया था हल्का सा भी नहीं थी कि हमारी और आपकी आखिरी बात होगी.. 2017 से आपका मेरा रिश्ता बहुत ज्यादा गहरा बन गया था हमेशा अपने बच्चों की तरह ही मुझे प्यार करते थे बाबूजी। ।
Posted by Abhishek Gupta on July 12, 2021
ॐ शांति
his Life

जन्म एवं बचपन के वर्ष

श्रीअतुल कुमार गुप्ता का जन्म 21 जुलाई 1956 को बिजनौर में ज़िले के सुप्रसिद्ध वकील श्री बनारसी प्रसाद गुप्ता एवं समाजसेविका श्रीमती विमला गुप्ता के घर हुआ था । 2 बहनों और 4 भाइयों के भरेपूरे परिवार में यह सबसे छोटे और सर्वाधिक लाडले थे । बचपन से ही इन्हे साहित्य, संगीत और क्रिकेट में अत्यधिक रूचि थी । 9 वर्ष की उम्र में भारत के प्रधामंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री के अकस्मात निधन से दुखी होकर इन्होने एक कविता "नहीं मरा है, नहीं मरेगा लाल बहादुर" लिखी थी जो उस समय परिवार और मित्रो में बहुत प्रचलित हो गयी थी । बचपन से ही देशप्रेम और समाजसेवा की भावना इनमें कूट कूट कर भरी थी ।

शिक्षा और किशोरावस्था

जीवन के हर पड़ाव पर प्रथम आना इन्होनें बचपन से ही सीख लिया था चाहें वो पढाई हो या वाद-विवाद प्रतियोगिता। सामान्य ज्ञान और अतिरिक्त पाठ्यक्रम गतिविधियों में सदैव सबसे आगे रहते थे । लॉ की पढाई के लिए कुछ समय बीकानेर में रहने के बाद बिजनौर का प्रेम इन्हे वापस खींच लाया और इन्होने अपना सम्पूर्ण जीवन बिजनौर में ही बिताया। 

विवाह

सन 1983 में 25 जून के दिन जब भारत की क्रिकेट टीम वर्ल्ड कप का फाइनल खेल रही थी ठीक उसी समय इनका विवाह चंदौसी निवासी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संचालक श्री मनोहर लाल अग्रवाल की सुपुत्री गार्गी से हुआ। विवाह उपरान्त इनका सामाजिक जीवन दुगनी गति से चलने लगा  जहाँ एक ओर श्री अतुल गुप्ता लायंस क्लब के प्रेसिडेंट बने,  श्रीमती गार्गी गुप्ता लायनेस क्लब की प्रेसिडेंट बनीं। जब श्री अतुल गुप्ता पश्चिमी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश संगठन मंत्री बने, उसी समय उनकी पत्नी इसी संगठन के महिला प्रकोष्ट की जिलाध्यक्ष बनीं। जहाँ एक और पति आर्य समाज में सक्रिय थे तो दूसरी और पत्नी आर्य स्त्री समाज में सक्रिय थीं । दोनों ने मिलकर आर्य सुगंध संस्थान (अनाथ दिव्यांग आश्रम) को पूरा सहयोग दिया जिसके फलस्वरूप और भी बहुत सारे लोग इस संस्थान से जुड़ गए और यह आश्रम अधिक से अधिक बच्चों की सहायता कर पाया। पति-पत्नी ने जीवन के हर कार्य में कदम से कदम मिलाकर चलने का अभूतपूर्व उदाहरण समाज के सामने रखा जिससे अनेक लोगों ने प्रेरणा ली। इस यात्रा में 20 वर्ष उपरान्त एक अवरोध आया जब इनकी पत्नी का आकस्मिक देहांत हो गया और इन्हे परिवार में दोहरी भूमिका निभाने पर मजबूर होना पड़ा । दोनों पुत्रों की देखभाल का दायित्व पूरी कुशलता से निभाते हुए भी इन्होने समाज सेवा के अपने संकलप को अपनी अंतिम सांस तक जारी रखा।
Recent stories

क्रिकेट की दीवानगी

Shared by Abhishek Gupta on July 16, 2021
कुछ लोग कहते हैं की "Cricket is my religion and Sachin is my God" पर अगर किसी व्यक्ति ने यह कथन सच में जिया है तो वो हैं श्री अतुल गुप्ता।  क्रिकेट के दीवानेपन की उनकी एक कहानी तो बहुत ही प्रसिद्धहै।  सन 1983 में 25 जून के दिन जब भारत की क्रिकेट टीम वर्ल्ड कप का फाइनल खेल रही थी, ठीक उसी समय इनका विवाह हो रहा था । यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी की उस समय इस क्रिकेट प्रेमी का मन अपनी शादी में नहीं परन्तु पूरी तरह से वर्ल्ड कप में था । हर फेरे के बाद मैच का स्कोर पूछने का सिलसिला चलता रहा और सातवा फेरा खत्म होते-होते वेस्ट इंडीज का अंतिम विकेट भी गिर गया । शादी के जश्न में भारत की जीत के जश्न ने चार चाँद लगा दिए ।

बस एक इतनी सी बात है, ज़िंदा हूँ जब तक दोस्त साथ हैं

Shared by Abhishek Gupta on July 15, 2021
यूं तो जीवन में हर इंसान बहुत सारे मित्र बनता है- कुछ स्कूल में, कुछ मोहल्ले पड़ोस में, कुछ कॉलेज में तो कुछ ऑफिस में।  कुछ मित्रों के साथ इंसान बचपन में खेलता है, स्कूल में पढता है तो कुछ के साथ घूमता-फिरता है और कुछ के साथ काम करता है।  हर मित्र का जीवन में एक ख़ास स्थान होता है और इनमे से कुछ से तो पूरे जीवन मित्रता रहती है।  कभी ऐसा भी हो जाता है की कुछ मित्रों का जीवन इस तरह से जुड़ जाता है कि वो जीवन के अंत समय तक साथ रहते हैं और साथ-साथ ही संसार को अलविदा कहते हैं।  ऐसे ही कुछ मित्र पापा के जीवन में भी थे और नियति का खेल कुछ ऐसा है की ५ घनिष्ट मित्र - श्री अतुल कुमार गुप्ता, श्री संजय स्वरुप बंसल, श्री नसीब पठान, श्री चेतन चौहान और श्री अजय गुप्ता का निधन कुछ ही अंतराल में हो गया, इनमें से चार तो कोरोना महामारी के कारण असमय ही इस संसार को अलविदा कह कर चले गए।  ऐसा उदाहरण तो संसार में मुश्किल से ही मिलेगा जहाँ इतने सारे करीबी मित्र संसार से साथ-साथ ही चले गए।  यह अत्यंत दुःख का विषय है परन्तु इस मित्रता के बारे में सोच कर एक सुख का अनुभव भी होता है, खासकर जब इनके किस्से याद आते हैं । ऐसे ही कुछ किस्से आपके साथ साझा करने का यह प्रयास है जिससे आप भी इन मित्रों की कहानी पढ़कर हर्ष का अनुभव कर सकें।  
१) श्री अजय गुप्ता - 'शेरों वाली कोठी वाले अज्जू बाबू " - यह वाक्य मैंने अपने जीवन में इतनी बार सुना है की अपने अंत समय तक यह मुझे याद रहेगा।  पापा के परम मित्र जिन्हे वह अज्जू भाई साहब कहते थे, वो पापा से करीब ५ साल बड़े थे । वह एक ऐसे व्यक्ति थे जो जीवन को खुल कर जीना अच्छी तरह से जानते थे, जब किसी पार्टी में डांस करते थे तो मुँह से यही वाक्य निकलता था कि यह तो बिजनौर के देव आनंद हैं।  हर समय अपने दोस्तों के काम आने वाले अज्जू ताऊजी और उनकी पत्नी वीना ताईजी पापा के जाने के २ सप्ताह बाद ही कोरोना की भेंट चढ़ गए। पापा और उनका साथ बहुत लम्बा था, दोनों से मिलकर लायंस क्लब बिजनौर सिटी की स्थापना करी थी, अज्जू ताऊजी क्लब के पहले अध्यक्ष और पापा पहले सेक्रेटरी बने थे। बहुत वर्ष बाद दोनों ने उस क्लब को पुनर्स्थापित करा और एक बार फिर दोनों क्रमशय अधयक्ष और सेक्रेटरी बने। कुछ ऐसा सम्बन्ध था दोनों का कि इतने वर्ष का अंतराल भी कुछ नहीं बदल सका।  
२) श्री संजय स्वरुप बंसल - पापा के एक और घनिष्ट मित्र जो हमारे परिवार के ही सदस्य थे, पापा से कुछ छोटे ज़रूर थे परन्तु उनका देहांत पापा से कुछ वर्ष पूर्व कैंसर से लड़ते हुए हो गया।  इन दोनों की मित्रता भी बहुत पुरानी थी और दोनों ने एक दूसरे का सुख और दुःख में हमेशा साथ निभाया। चाहे वो दादी कि अचानक तबियत बिगड़ने पर दिल्ली तक लेकर जाना हो, या फिर हमारे घर में एक क्रिमिनल के घुस जाने पर तुरंत घर में अपने बॉडीगार्ड के साथ आकर  उसको पकड़ना हो, हमेशा वो परेशानी के समय सबसे पहले खड़े मिलते थे।  
३) श्री नसीब पठान - पठान चाचा बिजनौर के हर व्यक्ति के लिए एक ऐसा उदहारण हैं  कि कैसे एक इंसान एक छोटे से शहर में एक साधारण घर में जन्म लेकर भी आकाश की बुलंदियों को छू सकता है।  शायद ही बिजनौर के किसी और व्यक्ति ने राजनीति में इतना ऊँचा मुकाम हासिल करा होगा।  उनकी गिनती कांग्रेस के देश के सर्वाधिक शक्तिशाली नेताओं में होती थी।  उनके दो किस्से मुझे हमेशा याद आते हैं - एक तो यह कि जब उन्हें पता चला की हम सब तिरुपति मंदिर दर्शन के लिए जाने वाले हैं तो उन्होंने घर आकर ५०० का नोट देकर कहा की मेरी तरफ से मंदिर में चढ़ा दीजियेगा, धार्मिक एकता के ऐसे उदाहरण मुश्किल से ही मिलते हैं।  दूसरा किस्सा यह है- उन्हें पता था कि पापा को फ़िल्मी सितारों से मिलने का बहुत शौक था इसलिए जब महेश भट्ट और इमरान हाश्मी चुनाव प्रचार के लिए आये तो पठान चाचा पापा को उन दोनों से मिलवाने सीधे उनके हेलीकाप्टर तक ले गए।  दोनों मित्र अलग अलग राजनैतिक विचारधारा से होकर भी एक दूसरे के बेहद करीब थे।  
४) श्री चेतन चौहान - भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज और अमरोहा से कई बार सांसद रहे चेतन चौहान पापा के एक करीबी मित्र थे।  दोनों का सम्बन्ध कुछ ऐसा था की एक बार चेतन अंकल रात को तकरीबन १० बजे अचानक घर आये और आकर सीधे मम्मी से कहा की आज यहीं खाना खाएंगे।  मम्मी ने तुरंत खाने का इंतज़ाम करा और उनको एवं उनके एक बस भरकर साथ में आये समर्थकों को खाना खिलाया, वह सभी मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने के लिए कश्मीर जा रहे थे और रास्ते में कुछ देर के लिए रुक गए थे ।  उस रात भगवान की लीला कुछ ऐसी हुई उनके साथ के बाकी लोग जो खाने के लिए नहीं रुके, उनकी आतंकवादियों ने रास्ते में हत्या कर दी।  चेतन अंकल हमेशा इस बाद को याद करके पापा से कहते थे की उस रात आपके खाने ने मुझे जीवनदान दे दिया।  दुर्भाग्यवश पीछे साल कोरोना की पहली वेव ने उनका जीवन असमय ही समाप्त कर दिया।